Friday, March 14, 2025

देवर ने मेरे साथ मनाई जमकर सुहागरात.

देवर ने मेरे साथ मनाई जमकर सुहागरात......

 हेलो दोस्तों मैं अनीता आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालो से इसकी नियमित पाठिका रही हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी सेक्सी स्टोरीज नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी कहानी सूना रही थी। आशा है की ये आपको बहुत पसंद आएगी।


दोस्तों मेरी शादी बनारस में एक अच्छे घर में हुई थी। मेरे पति सरकारी डॉक्टर थे और बनारस के सरकारी अस्पताल में नौकरी करते थे। मेरी शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे। मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते थे। घर में मेरे सास, ससुर और एक देवर संजय था। वो बहुत प्यारा था और मेरा हमेशा ख़याल रखता था। वो भी डॉक्टर बनना चाहता था और अभी नीट की तैयारी कर रहा था। मैं अपनी ससुराल में बहुत खुश थी। एक दिन अचानक संजय ने मुझे फोन किया।“भाभी भैया का ऐक्सिडेंट हो गया है। जल्दी से अस्पताल आ जाओ” संजय बोला दोस्ती ये बात सुनकर मुझे चक्कर आने लगा। मैं जल्दी से अस्पताल गयी पर तब तक मेरे पति की मौत हो गयी थी। मैं बेहोश हो गयी थी। पति के मरने के बाद मैं बिलकुल मरियल हो गयी थी। अब मेरी जिन्दगी में सब तरफ अँधेरा ही अँधेरा था। मैं पूरा पूरा दिन रोती रहती थी। खाना नही खाती थी। मैं डीप्रेशन में आ गयी थी। इस तरह से 4 महीने गुजर गये। मेरे पापा मम्मी मेरी ससुराल आये हुए थे। मेरे सास ससुर और पापा मम्मी ने फैसला किया की मैं अब अपने देवर संजय पर बैठ जाऊं। मेरी शादी अब मेरे देवर से कर दी जाए।
“बेटी!! अकेले तू इतनी लम्बी जिन्दगी नही काट सकती। तुझे अब अपने देवर से शादी करनी होगी” मेरी मम्मी बोली
“मम्मी! जो आपको सही लगे करिये” मैंने कहा

उसके बाद मेरी शादी मेरे देवर संजय से कर दी गयी। ये कार्यक्रम सादे समारोह में कर लिया गया। क्यूंकि मैं अब विधवा हो चुकी थी। इसलिए कोई जादा ख़ुशी का मौका नही था। पंडित ने मेरी और संजय की शादी करवा दी। फिर अग्नि के 7 फेरे लेकर हम पति पत्नी बन गये। शादी के बाद हम दोनों अपने कमरे में सुहागरात मनाने आ गये थे। अब मेरा देवर संजय ही मेरा नया पति था। मैंने लाल रंग की अच्छी सी साड़ी पहन रखी थी। मैं कमरे में आकर बेड पर एक तरफ बैठ गयी। मैं बार बार संजय को तिरछी नजरो से देख रही थी। उसने कपड़े बदल लिए और कुर्ता पजामा पहन लिया।

वो भी बिस्तर पर एक तरफ बैठ गया था। वो काफी संकोची स्वाभाव का था। मैं तिरछी नजरो से अब अपने नये पति संजय को देख रही थी और सोच रही थी की कैसा किस्मत का खेल है। जिस देवर के साथ मैं हंसी मजाक करती थी और ठिठोली करती थी आज वो मेरा पति परमेशवर बन गया है। संजय मुझे देखने लगा। उसने धीरे से मेरे हाथ को पकड़ लिया। मैं डर गयी और कापने लगी। मैं जान गयी थी की अब वो मुझे चोदेगा।

“भाभी अगर आज आपका सुहागरात मनाने का मन नही है तो कोई बात नही। मैं कोई जोर जबरदस्ती नही करूँगा। आप पहले मेरी भाभी हो बाद में मेरी पत्नी हो!!” संजय बोला और दूसरी तरह मुंह करके लेट गया। मैं चुप थी और अपनी जिन्दगी के बारे में सोच रही थी। अब मुझे लग रहा था की संजय बुरा लड़का नही है। धीरे धीरे मैं नार्मल हो गयी। दोस्तों मेरी सास मेरे कमरे में दूध का गिलास और मिठाई रख गयी थी।
“संजय!!” मैंने उसे आवाज दी। उसने मेरी तरह मुंह किया 

“क्या है भाभी???” वो बोला
“भाभी नही अब मुझे अनीता बोलो!!” मैंने कहा
उसके बाद संजय बैठ गया। मैंने उसे अपने हाथो से दूध पिलाया। फिर हम प्यार करने लगे। संजय ने मेरे सिर पर से मेरा पल्लू हटा दिया। फिर मुझे बाँहों में भर लिया। हम दोनों किस करने लगे। संजय जल्दी जल्दी मेरे होठ चूसने लगा। कुछ ही देर में हम दोनों चुदासे हो गये।
“अनीता चलो जल्दी से कपड़े उतार दो” संजय बोला। 

फिर वो अपने कपड़े उतारने लगा और मैं अपने। मैंने अपनी साड़ी खोलनी शुरू कर दी। फिर ब्लाउस और पेटीकोट भी निकाल दिया। फिर मैंने अपनी ब्रा और पेंटी भी उतार दी। दोस्तों मैं बहुत गोरी और सुंदर लड़की थी। मेरा बदन बहुत गोरा, भरा हुआ और सुडौल था। मेरा फिगर कमाल का था। मैं बहुत सेक्सी और हॉट माल लगती थी। 36, 30, 34 का फिगर था मेरा। छरहरा और बिलकुल फिट। मेरे बूब्स 36” के बड़े बड़े और गोल थे। मैं पूरी तरह से नंगी हो गयी और वापिस आकर बेड पर बैठ गयी। संजय भी नंगा होकर मेरे पास आ गया। उसका लंड अभी सूखा हुआ था और खड़ा नही था। संजय ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। फिर बाहों में भरकर किस करने लगा। हम दोनों कुछ ही देर में गर्म हो गये थे और एक दूसरे को किस कर रहे थे।
संजय ने मुझे सीने से लगा लिया और मुझे वो हर जगह चूम रहा था। मेरे हाथ, पैर, कमर, पेट, गले, गाल, मत्थे सब जगह उसने चुम्बन की बारिश कर दी थी। मेरी टांगो, जांघो, और पुट्ठो को संजय हाथ से छू और सहला रहा था। मुझे अच्छा लग रहा था। मैंने अपने बाल खोल दिए थे जिससे मैं और सेक्सी माल लग रही थी। फिर संजय ने मेरे मम्मो को पकड़ लिया और हाथ से सहलाने लगा। वो मेरे उपर लेट गया और मेरे रसीले और सेक्सी होठ चूसने लगा। फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये और 15 20 मिनट तक हम दोनों चिपके ही रहे और मजा लेते रहे। संजय मुझे सीने से लगाकर बिस्तर पर घुमड़ी खाने लगा। हम दोनों गोल गोल करवट ले रहे थे और मस्ती कर रहे थे। कभी संजय नीचे हो जाता कभी मैं।
“भाभी दूध पिलाओ ना” संजय बोला “श श श अब मैं तुम्हारी भाभी नही बीबी हूँ। प्लीस मुझे अनीता कहकर बुलाया करो” मैंने शिकायत के अंदाज में कहा

“नही भाभी!! तुम तो मेरे लिए हमेशा भाभी रहोगी क्यूंकि भाभी बीबी से जादा सेक्सी और चुदासी माल होती है” संजय हंसकर बोला
“अच्छा???” मैंने कहा और मैं भी हँसने लगी
फिर संजय ने मेरे हाथ खोल दिए और मेरे आम को हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगा। बिना देर किये संजय ने मेरे मम्मे को हाथ में ले लिया और उसका साइज पता करने लगा। मेरे दूध बहुत सुंदर थे, छातियाँ भरी हुई, सुडौल और गोल गोल थी, जैसे उपर वाले ने कितनी फुर्सत से बैठकर मेरी जैसी माल और मस्त चोदने लायक लड़की बनाई थी। मेरी उजली छातियाँ पूरे गर्व से तनी हुई थी। छातियों के शिखर पर अनार जैसे लाल लाल बड़े बड़े घेरे मेरी निपल्स के चारो ओर बने थे, जिसमे मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। संजय की नजर मुझ पर जम गयी। तेजी से उसने मेरी रसीली बलखाती चुचियों को अपने वश में कर लिया और दोनों मम्मो को दोनों हाथ से दबोच लिया और तेज तेज दबाने और मसलने लगा।
““उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….” मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। संजय मेरे दूध को किसी हॉर्न की तरह दबाने लगा। मुझे भी काफी मजा आ रहा था। फिर वो लेटकर मेरे दूध मुंह में लेकर पीने लगा। मैं तडप गयी। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी।
‘भाभी!! तुम इतनी कड़क माल हो की जो मर्द तुमको एक बार देख ले उसका लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाएगा और वो तुमको चोदकर ही मानेगा’ संजय बोला। मुझे उसकी बात अच्छी लगी। वो फिर से मुझ पर लेट गया और हपर हपर करके लपर लपर करके मेरी नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा। वो तो बहुत शरारती निकला। वो मेरी नुकीली छातियों को दांत से काट रहा था और पी रहा था। मुझे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था। ‘संजय!…प्लीस आराम से मेरे नारियल चूसो!! आराम से चूसो!!’ मैंने कहा। पर उस पर कोई असर नही पड़ा। वो अपनी धुन में था। जोर जोर से मेरी सफ़ेद कदली समान चूचियाँ दांत से जोर जोर से काट कर पी रहे था। वो बहुत जादा चुदासा हो गया था। उसका बस चलता तो मेरी छातियाँ खा ही लेता। मेरी रसीली छातियों को वो जोर जोर से दबा रहा था और निपल्स पर अपनी जीभ फेरते थे और पी रहा था। दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा। संजय ने मेरे हाथ में अपना लंड दे दिया।
“भाभी चूसो ना प्लीस” वो किसी छोटे बच्चे की तरह मनुहार करता बोला। हाय दादा!! कितना बड़ा लौड़ा था उसका। 9 इंच था। मैंने हाथ में लिया तो मैं डर गयी थी। मुझे डर लग रहा था की इतना बड़ा लंड मेरी चूत में कैसे अंदर जाएगा। फिर मैं जल्दी जल्दी उसका लंड फेटने लगी। कुछ ही देर में संजय का लंड खड़ा हो गया था। वो देखने में बहुत ही सेक्सी लंड लग रहा था। जैसे किसी गधे का लंड हो। मैं जल्दी जल्दी उसे उपर नीचे करके फेटने लगी। संजय को भी बहुत मजा आ रहा था। वो आह आह की आवाज निकाल रहा था। मैं और जल्दी जल्दी उसका लंड फेटने लगी। फिर मुंह में लेकर मैं चूसने लगी। बार बार मेरे बाल नीचे गिर जाते थे। बार बार मुझे बालों को उपर कान के पीछे ले जाना पड़ता था।
संजय का लंड तो बहुत ही रसीला था। मैं मुंह में लेकर जल्दी जल्दी चूसने लगी। संजय मेरी चूत सहलाने लगा। धीरे धीरे मैं गर्म हुई जा रही थी। फिर मैंने उसके लंड को गले में अंदर तक भर लिया। बड़ी देर तक मैंने लंड बाहर ही नही निकाला। फिर कुछ मिनट बाद मैंने उसका लंड बाहर निकाला। उसे मेरा ये कारनामा बड़ा अच्छा लगा। फिर मैंने जल्दी जल्दी मेहनत से संजय का लंड चूसने लग गयी और हाथ से फेट रही थी। मेरा हाथ तो रुकने का नाम ही नही ले रहा था। गोल गोल मैंने अपने हाथ से संजय का मोटा लंड फेट रही थी। वो तडप रहा था। उसे बड़ा कामुक महसूस हो रहा था। बहुत सेक्सी अहसास उसे हो रहा था। संजय का लंड इतना लम्बा था की मेरे हाथ में नही आ रहा था। किसी मोटे खीरे की तरह दिख रहा था। मैं जल्दी जल्दी फेट फेट कर चूस रही थी। मेरे मुंह में उसका वीर्य चुपड़ गया था और चिपचिपे माल से डोरी जैसी निकल रही थी। मैं मेहनत से किसी रंडी की तरह उसका लंड जल्दी जल्दी चूस रही थी। अब उसका लंड और जादा फूलकर बड़ा हो गया था। मैं डर रही थी की कहीं उसका लंड मेरी चूत ना फाड़ दे।
संजय मेरी चूत पर आ गया और उसने मेरी गोरी खूबसूरत टाँगे खोल दी। मैं शरमा गयी। ‘भाभी! तेरी चूत बहुत सुंदर है। मैंने कई चूत मारी है पर तुम्हारी चूत सबसे जादा सुंदर है’ संजय बोला। मुझे ये सुनकर गर्व हुआ। किसी ने तो मेरी चूत की तारीफ़ की। दोस्तों, हर सुबह मैं जब नहाती थी अपनी चूत जरुर देखती थी। उसे साबुन से मल मल कर नहलाती थी। इसलिए वो बहुत साफ़ और चिकनी थी और बहुत खूबसूरत लगती थी। वो बड़ी देर तक मेरी गुलाबी चूत के दर्शन करता रहा। फिर मेरी चूत पीने लगा। अपने ओंठ को लगा लगाकर मेरी चूत पीने लगा। मैं सिसकने लगी। दोस्तों जादातर औरतो की चूत अंदर की ओर धंसी हुई होती है, पर मेरी चूत तो खूब बड़ी सी थी और बाहर ही तरफ उभरी हुई थी। एकदम फूली हुई गुप्पा सी गुलाबी रंग की चूत थी मेरी चूत। संजय की जीभ मेरी चूत को मजे लेकर चाट रही थी। मुझे बहुत सनसनी महसूस हो रही थी। मैं अपनी चूचियों को खुद ही जोर जोर से हाथ में लेकर दबा रही थी। कहना गलत ना होगा की मुझे भी आज खूब मजा मिल रहा था।
इसके साथ ही उसने अपनी हाथ की बीच वाली ऊँगली मेरी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगे। “आऊ….. आऊ…..हमममम अहह्ह्ह्हह….सी सी सी सी.. हा हा हा..” करके मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। मैं क्या करती दोस्तों, मेरी चूत में अजीब से सनसनाहट हो रही थी। संजय जल्दी जल्दी अपनी मध्यमा से मेरी बुर फेटने लगा। मैं अपनी कमर और पेट उपर उठाने लगी। मेरा गला बार बार सुख रहा था। अजीब हालत थी ये। मेरे तन मन में सनसनाहट हो रही थी। एक तरफ संजय की ऊँगली, तो दूसरी तरह उनकी जीभ और होठ। आज मेरा बच पाना मुश्किल ही नही नामुमकिन था।
संजय को जाने क्या मजा मेरी चूत पीने में मिल रहा था, मैं नही समझ पा रही थी। उसकी जीभ मेरे जिस्म के सबसे कोमल और सम्वेदनशील हिस्से से खेल रही थी। ये विचित्र और अलग अहसास था। मेरे चूत के दाने को वो अपने दांत से पकड़ लेता था और उपर की तरह खीच लेता था। मैं पागल हो रही थी।
“प्लीससस……प्लीससस.. उ उ उ उ ऊऊऊ…..ऊँ—ऊँ….ऊँ…संजय अब मुझे चोद लो वरना मैं मर जाउंगी!!” मैंने कहा
देवर ने पति बना संजय अब मुझे चोदने को रेडी था। फिर संजय ने अपना बड़ा सा लौड़ा मेरे भोसड़े पर सेट कर दिया और धक्का जोर से अंदर की तरह मारा। उसका लंड किसी मिसाइल की तरह मेरी चूत में प्रवेश कर कर गया। दोस्तों मेरे पहले पति का लंड संजय से छोटा था। वो मुझे चोदकर इतना मजा नही दे पाते थे जितना की आज संजय दे रहा था। आज मैं खुलकर अपने देवर के साथ सुहागरात मना रही थी।
दोनों पैर उठाकर मैं संजय से चुद रही थी। वो मुझे हप हप करके चोदने लगा। मैं “आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई..अई..अई….अई..मम्मी…..” करके सिसकारी लेने लगी। मोटा लौड़ा खाने में कुछ जादा मजा आता है। क्यूंकि इससे चूत अच्छी तरह से चुद जाती है। चूत की दीवारों में मोटा लौड़ा जादा रगड़ और जादा घर्षण पैदा करता है जिससे चरम सुख मिलता है। इस तरह मैं आज संजय से मजे से चुदवाने लगी। मैं सीधा लेटकर दोनों टाँगे फैलाकर चुदवा रही थी। फिर वो अचानक जोर जोर से इतनी जोर से धक्के देने लगा की मुझे लगा की जमीन ही खिसक जाएगी। मेरे कमरे में पट पट का शोर होने लगा लगा।
“…..अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्……उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह…..चोदोदोदो…..मुझे और कसकर चोदोदो दो दो दो” मैं पागलो की तरह गुहार लगा रही थी। ये मेरी चुदाई और गहरी ठुकाई का मीठा शोर था। इस ध्वनि से आज मेरा घर पवित्र हो गया। मेरी चूत फटते फटते बची। फिर वो जवान लौंडा मेरी योनी में ही झड गया। 10 मिनट बाद ही वो फिर से गर्म हो गया और उसने मेरी गांड के नीचे 2 मोटा तकिया लगा दिया। फिर उसने मेरी गांड में तेल लगाकर दिया और लंड में भी तेल चुपड़ लिया। फिर संजय ने मेरी गांड पर अपना 9” का मोटा लंड सेट कर दिया और जोर से अंदर माल दिया। फिर वो मेरी गांड जल्दी जल्दी चोदने लगा। मुझे काफी दर्द हो रहा था पर मजा भी भरपूर मिल रहा था।
संजय पूरे जोश में मेरी गांड जल्दी जल्दी चोद रहा था। उसे किसी कुवारी लड़की की तरह कसावट मिल रही थी। दोस्तों मेरे पति मेरी गांड नही मारते थे। कुछ देर बाद मैं आनंद में डूब गयी थी। मुझे बड़ा सेक्सी फील हो रहा था। संजय ने मेरी गांड चोद चोदकर छेद बड़ा कर दिया था। फिर उसने माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया। मेरी सुहागरात पर देवर से पति बने संजय ने 3 बार मेरी चूत चोदी और 2 बार गांड मारी। सुबह जब मैं उठी तो मेरा बदन टूट रहा था। सारे बदन में दर्द हो रहा था। पर रात में मुझे भरपूर मजा मिला था। कहानी आपको कैसे लगी,

Wednesday, March 12, 2025

Free Hindi Sex Stories Bhabhi भैया भाभी की सुहागरात का लाइव दर्शन

भैया भाभी की सुहागरात का लाइव दर्शन 

हॉट भाभी की सुहागरात के लिए सारी तैयारी का जिम्मा मुझे दिया गया. भैया भाभी की लाइव सुहागरात देखने का मन था मेरा … मैंने इसका जुगाड़ कैसे किया?

प्रिय पाठको, नमस्कार, आपका प्यारा अनुराग अग्रवाल उर्फ़ अनु आपके सामने हाजिर है.
आपने मेरी पिछली सेक्स कहानी
पड़ोसन लड़की की गांड की चुदाई की
को पढ़ा, इसके लिए आपका तहेदिल से धन्यवाद.

अन्तर्वासना पर कहानियां पढ़कर मुझे भी अपने अनुभव सेक्स कहानियों के रूप में लिखने को हौसला हुआ.
आपके मेल और कमेंट्स से उत्साह बढ़ा और बस मैंने भी अपनी आपबीती लिखनी शुरू कर दीं.

मुझे विश्वास है कि आपको इन कहानियों को पढ़कर बहुत मजा आएगा.


दोस्तो, चूत का नशा क्या होता है, ये आपको भी जरूर पता होगा.कितना मजा आता है औरत की चूत चोदने में, ये वही बता सकते हैं जो भांति भांति की उम्र की औरतों लड़कियों आदि की चुत में अपना लंड पेल कर मजा लेते हैं जब मैंने पहली बार चुत में लंड पेला तो मुझे भी चूत का नशा चढ़ गया था.फिर तो जहां देखा तो बस हसीन-हसीन चूत ही दिखाई देने लगी थीं और कुछ नसीब ने भी साथ दिया तो अनेको किस्म के छेद चोदने को मिले.

आज भी इन हसीन चूतों ने मेरे दिल को बेकरार किया हुआ है.
इस चूत चुदाई के नशे में एक से एक हसीन और दिलकश माल मेरी जिन्दगी में भी आईं, उनके साथ हुए हर सेक्स किस्से को मैं आपसे एक एक करके साझा करूंगा.

मेरी सबसे पहली माशूका हिमानी थी जो मेरी ताई जी के घर के पास ही रहती थी.
मेरे भैया की शादी के मौके पर मैंने उसको पटाकर उसकी नशीली चूत और गांड का रसपान कर लिया था. उसे मैंने आपको अपनी सेक्स कहानी

भाई की शादी में कुंवारी लड़की की बुर का मजा
में विस्तार से बताया था.

हिमानी की चूत पहली बार चोदने को मिली तो ज्ञान प्राप्त हुआ कि इस छेद में लंड पेलने में कितना आनन्द आता है.

मैंने उसे चोद कर पहली बार महसूस किया था कि कई बोतल शराब का नशा कर लिया हो.

उस अनुभव के बाद मैंने समझ लिया था कि इंसान की जिन्दगी में सेक्स का अहसास अत्यंत ही सुखद होता है.
यह एक ऐसा मीठा अहसास होता है जो कि जिन्दगी भर एक प्यारे से ख्वाब के रूप में हमेशा आपके जहन में तरोताजा रहता है.

आज लगभग 22 साल बाद भी मेरे उस अहसास को आप समझ सकते हैं कि मैं उसे आपके लिए लिख रहा हूँ.

मेरी ताईजी के लड़के संजय भैया की शादी मोहिनी नाम की लड़की से हुई थी.
मोहिनी भाभी शादी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थीं.

किसी भी लड़की के लिए उसकी शादी में अपने आपको सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखने की भी जिम्मेदारी होती है और जिन्दगी में वो शादी का दिन ही होता है, जब कोई लड़की अपने आपको सबसे खूबसूरत बनाना चाहती है.

वास्तव में आज मोहिनी भाभी भी वहां उपस्थित सभी लड़कियों और औरतों के बीच अलग ही नजर आ रही थीं. उनकी खूबसूरती और सभी पर भारी थी.

उस दिन हम सभी भाभी को विदा कराकर वापस घर आ गए थे.


बहू के आने के बाद के सभी रीति रिवाज भी हो गए थे.

अब भाभी जी को उनके कमरे में भैया के साथ बैठा दिया गया था.

मैं मोहिनी भाभी से कई बार मिल चुका था और फोन पर भी मेरी काफी बार भाभी से बात हुई थी इसलिए वो मुझसे ज्यादा सहज थीं.

मैं भाभी के कमरे में आया तो देखा भैया तो खर्राटे भर रहे थे लेकिन भाभी बेड के एक ओर बैठी थीं.

मेरे अन्दर आते ही भाभी बोलीं- आओ अनुराग!
मैं- भाभी जी, कैसी हो और कैसा लग रहा है हमारा घर?

मोहिनी- भैया जी, बहुत बढ़िया घर है … और बताओ, आप कैसे हैं?
मैं- भाभी जी, बढ़िया … आप आज बहुत हसीन लग रही हो, किसी की नजर न लग जाए.
मैंने मुस्कुराते हुए कहा.

तो मोहिनी भाभी शर्माती हुई बोलीं- भैया जी, कैसी बात कर रहे हो, क्या सच्ची में मैं ऐसी लग रही हूँ?
मैं- हां भाभी जी, वास्तव में आज तो आप बहुत ही सुन्दर लग रही हो. आज तो भैया भी आपकी खूबसूरती का जमकर मजा लेंगे.

मोहिनी भाभी शर्माती हुई बोलीं- भैया, तुम भी कैसी बात करते हो, देखो अपने भैया को, खर्राटे भर रहे हैं.
मैं- शायद थकान मिटा रहे हैं. कोई बात नहीं, रात तक ठीक हो जाएंगे.

मैंने भी हंसते हुए भाभी जी से कहा और बोला- आज रात को तैयार रहना.
मोहिनी भाभी मुझे आंख मारती हुई बोलीं- अच्छा जी, चलो देखते हैं आज रात को!

तभी बाहर से किसी ने मुझे आवाज दी- अनुराग … अनुराग!
मैं भाभी से बोला- शायद कोई बुला रहा है, मैं अभी आता हूँ. वैसे भाभी रात के लिए अभी से आपको गुडलक बोल देता हूँ और आपके कमरे की सजावट भी मुझे ही करवानी है.
ऐसा कहकर मैं बाहर आ गया.

पर मेरा दिल भाभी पर फिदा हो गया था. आज वो किसी हसीना से कम नहीं लग रही थीं.
माथे पर टीका, लाल रंग का शादी का जोड़ा, नाक में नथ, गले में एक सुन्दर जड़ाऊ हार पहने हुए भाभी रूपवती लग रही थीं.
उन्हें देखकर मेरा मन तो बस उन पर ही लट्टू हो गया था.

उनके बूब्स, मटकती गांड को देखकर मेरा मन डोले ही जा रहा था.

मैं मन ही मन सोच रहा था कि काश मैं भी भाभी के हुस्न का दीदार कर पाता.

अचानक ऐसा सोचते ही मेरे मन में एक बहुत सुन्दर युक्ति आई कि किस प्रकार आज भैया और हॉट भाभी की सुहागरात देख कर मजा लिया जा सकता है.


भैया और भाभी के सुहागरात वाले कमरे को सजाने की जिम्मेदारी मुझे ही दी गई थी.
घर में बहुत सारे काम थे और आज महिला संगीत का कार्यक्रम भी पास ही की एक धर्मशाला में आयोजित था.

घर में मेहमानों की चहल-पहल थी और नई नवेली दुल्हन के स्वागत में घर की सभी स्त्रियां बहुत उत्साहित थीं.
नई नवेली दुल्हन के आने पर घर में बहुत सारे रीति रिवाज होते हैं, बस सभी उन्हीं में लगे हुए थे.

मैं भी बहुत उत्साहित था.
एक तो नई भाभी आने की खुशी थी और दूसरी हिमानी के साथ बिताए उन पलों की याद मेरे जहन में बसी हुई थी.
उस रात मैंने पहली बार किसी स्त्री के गुप्त रहस्य को जाना था.

दोस्तो, एक बात तो है कि एक बार इस गुप्त रहस्य को जानने के बाद तो हर वक्त ऐसा महसूस होता कि बार-बार इस गुप्त रहस्य का पता लगाया जाए कि स्त्री की चूत की गइराई कितनी होती है.

स्त्री की गहराई जिसे आज तक कोई नहीं जान पाया.
मैं भी कितना मूर्ख हूं, किस चीज की गहराई नापने की बात कर रहा हूं.

कुछ देर बाद मैं दुबारा से भैया और भाभी वाले कमरे में गया, जहां अब बहुत ही ज्यादा गहमागहमी थी.
भाभी एक तरफ अपना मुँह पर घूंघट डाले बैठी थीं … और बहुत सारी महिलायें उनके पास बैठी थीं.

तभी ताई जी ने कमरे में प्रवेश किया और वहां खड़ी कामवाली जिसका नाम रेखा था, उससे कहा- रेखा, संजय और बहू के लिए चाय नाश्ता लगा लाओ. बहू भूखी होगी … और ये रात भर से सोई नहीं है, थकी भी होगी.

फिर ताई जी मोहिनी भाभी की ओर मुँह करके बोलीं- बहू, चाय नाश्ता करके थोड़ी देर आराम कर लो, फिर 3 बजे से महिला संगीत है. बहुत सारे मेहमान आने वाले हैं. नाच गाने का प्रोग्राम है.

मोहिनी भाभी ने हां में अपना सिर हिलाया.

इतना कहकर ताई जी वहां से चली गईं.

मैं वहीं भैया व भाभी के पास बैठकर उनसे बातें करने लगा.

भाभी हंस कर बोलीं- अच्छा छोटे देवर जी, आप तो बहुत परेशान करते हो.
मैं भी हंसने लगा और बोला- भाभी जी बहुत परेशान करूंगा आपको, आप हैं ही इतनी सुन्दर … अच्छा थोड़ी देर में आप धर्मशाला जाने के लिए तैयार हो जाओ.

दोस्तो, उस समय इस तरह के कार्यक्रम के लिए धर्मशाला ही मिलती थीं. आज की तरह होटल और कैटरिंग की व्यवस्था नहीं होती थी.
अपने आप ही सारा इंतजाम करना होता था. पर इन सब कामों में बहुत मजा आता था.
शादी के समय सभी कई दिनों तक शादी के कार्यक्रमों का आनन्द लिया करते थे.

घर के पास ही सेठ जी की धर्मशाला थी, वहीं पर महिला संगीत का कार्यक्रम था.

मैं, राघव भैया और बहुत सारे रिश्तेदार महिला संगीत के कार्यक्रम का प्रबन्ध कर रहे थे.
हलवाई, टैन्ट और बहुत सारा कार्य था, जिसकी देखभाल मैं, राघव भैया उनकी मित्र मण्डली कर रही थी.

मैं वापिस ताई जी के घर आ गया था, कुछ सामान घर से धर्मशाला ले जाना था और कुछ धर्मशाला से घर पर.

यही सब काम निबटा रहा था मैं … अब तक घर पर हिमानी भी आ गई थी.

हिमानी मेरी गर्लफ्रेंड थी, जिसकी नथ मैंने कल ही भैया की शादी में उतारी थी.
वो भाभी के नजदीक ही बैठी थी.

मैं जैसे ही कमरे में घुसा, मेरी नजर हिमानी पर पड़ी और मैंने उसे दूर से ही एक प्यारी पप्पी दे दी.

वो मुस्काई, कुछ सकुचाई और मेरी प्यारी पप्पी का जवाब उसने भी आंख दबाकर दे दिया.

मैं भाभी के कमरे में आया.
वहां बैठी अन्य महिलाओं व भाभी जी से जल्दी तैयार होकर धर्मशाला जाने की बात कहकर बाहर आ गया.

घर के अन्य सदस्य व मेहमान भी अब धर्मशाला जा रहे थे.

ताई जी मुझसे बोलीं- अरे अनुराग, अपनी भाभी को तू धर्मशाला ले जाएगा, ये तेरी जिम्मेदारी है.
मैंने भी मुस्कराकर हामी भर दी.

भाभी को मैं अपनी नई बाईक पर बैठा कर धर्मशाला ले आया.

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एक महीने पहले ही मैंने अपनी नई बाईक ली थी, बाईक पर बैठा कर भाभी को धर्मशाला लाने में मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति हुई.

आप खुद समझदार हैं, भाभी के गोल गोल गुब्बारे मेरी पीठ को आनन्दोलित कर रहे थे.
उनके गुब्बारों को स्पर्श मुझे मदहोश किए जा रहा था.

अब हम दोनों धर्मशाला आ गए और उधर महिला संगीत का प्रोग्राम चालू हो गया.
सभी हंसी खुशी महिलाओं के नाच गाने का आनन्द ले रहे थे.

मैं और हिमानी भी भाभी के बगल में ही बैठकर मजा ले रहे थे.

भाभी को मैं बहुत उत्साहित कर रहा था- मोहिनी भाभी आज बहुत बढ़िया नाचना है, आपको भैया की कसम, ऐसा नाचना है कि सबकी छुट्टी कर देनी है.
तो भाभी मुझे आंख मारती हुई बोलीं- मेरे प्यारे देवर जी, चिन्ता ना करो, बस आप देखते जाओ. आज तो मैं सबकी छुट्टी ही कर दूंगी.

उन्होंने दो तीन गानों जिनमें से
गोरी हैं कलाइयां, ला दे मुझे हरी हरी चूड़ियां,
छोड़ के आई बाबुल का घर
उन पर बहुत ही बढ़िया डांस किया.

भाभी के इस बढ़िया डांस पर वहां खड़ी हमारी ताईजी, बुआजी व भैया ने वार फेर कर भाभी को बहुत सारे रूपए दिए.

हिमानी भी मेरे पास ही बैठी थी, उसने भी दो तीन गानों पर बहुत बढ़िया डांस किया.

सभी इस महिला नाच गाने का आनन्द ले रहे थे, अपने दोस्तों के साथ व्यस्त थे. इस मौके पर शराब का सरूर ना हो, तो प्रोग्राम का मजा ही अधूरा था.

छोटे भैया ने तो बहुत ज्यादा ही पी ली थी और बड़े भैया के दोस्तों ने भी भैया को भी काफी शराब पिला दी थी इस कारण उनकी स्थिति भी अच्छी नहीं थी.

अब प्रोग्राम लगभग समाप्ति की ओर था.
नाच गाना, खाना पीना सभी कार्य अच्छी प्रकार से समाप्त हो गए थे.

सभी मेहमान चले गए थे, अब हम सब भी वापिस घर की ओर आने लगे थे.

दोस्तो इस सेक्स कहानी के अगले भाग में आपको मोहिनी भाभी की सुहागरात का सीधा प्रसारण पढ़ने को मिलेगा.

Wednesday, March 5, 2025

बिंदिया की गर्मी🔥🔥🔥🔥🔥

 बिंदिया की गर्मी🔥🔥


गाँव की पगडंडियों से गुजरते हुए सूरज की किरणें हल्के-हल्के बिंदिया के चेहरे पर पड़ रही थीं। गुलाबी साड़ी में उसका लहराता आँचल और कमर की मस्त लचक किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थी। गाँव की औरतें जब कुएँ पर पानी भरने जातीं, तो उनकी हंसी-ठिठोली में बिंदिया का नाम जरूर आता।💥

बिंदिया की शादी कुछ साल पहले राजू से हुई थी, जो शहर में काम करता था और महीने में एक बार गाँव आता। मगर जवानी का जोश, वो भी अकेले में, चैन कहाँ लेने देता? उसकी गहरी आँखों में एक प्यास थी, जो किसी अपने के स्पर्श की तलाश में भटकती रहती।👄👄👄


मुठभेड़🔥🔥


उस दिन दोपहर में बिंदिया घर के आँगन में आम चुन रही थी, जब पीछे से किसी की नजरों की तपिश उसने महसूस की। मुड़कर देखा, तो सामने वीरू खड़ा था—गाँव का लंबा-चौड़ा हट्टा-कट्टा जवान। उसकी आँखों में एक शरारत थी, और बिंदिया को वो नजरें जैसे आर-पार चीर रही थीं।

"क्या देख रहे हो?" बिंदिया ने घूंघट हल्का सा सरकाते हुए पूछा।


वीरू ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, "देख रहा हूँ, कोई इतना सुंदर कैसे हो सकता है?"


बिंदिया का चेहरा लाल हो गया, मगर दिल धड़कने लगा। वीरू पास आया, और उसके हाथ में रखा आम धीरे से छू लिया। "बहुत मीठा है?" उसने फुसफुसाकर पूछा।

बिंदिया का गला सूखने लगा, "पता नहीं, चखकर देख लो…"

गर्माहट की लहर🔥🔥

वीरू ने धीरे से आम को उसके होंठों के पास ले जाकर कसमसाते हुए कहा, "अगर तुम्हारी इजाज़त हो तो..."


बिंदिया ने नजरें झुका लीं, लेकिन उसकी साँसों की गरमाहट वीरू के चेहरे तक पहुँच रही थी। वीरू ने आम को हल्के से दबाया, रस टपकने लगा, और बिंदिया के होंठ भीग गए। वीरू की उंगलियाँ धीरे से उसकी कलाई पर सरक गईं, और एक मीठी झुरझुरी बिंदिया के बदन में दौड़ गई।


हवा भी उस पल को महसूस कर रही थी, और पेड़ों के पत्ते शरारत से सरसराने लगे।

आगे की कहानी में… क्या बिंदिया अपने दिल की सुनेगी? या फिर समाज की बंदिशें उसे रोक देंगी? अगर आपको यह कहानी पसंद आई तो बताइए 🔥🔥🔥🔥

Tuesday, March 4, 2025

भाबी का मजा मैंने लिया

 गर्म साँसों की सरगर्मी. Desi Bhabhi 


शीतल एक खूबसूरत, सजी-धजी, पारंपरिक लेकिन दिल से बेहद चंचल और मनमौजी भाभी थी। उसकी शादी को चार साल हो चुके थे, और उसका पति, रोहित, काम के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर ही रहता था। बड़ा घर, सजी-संवरी अलमारी, और आरामदायक जिंदगी—सब कुछ था, लेकिन कहीं न कहीं उसके दिल में एक अजीब-सी कसक थी।

Hot story 



गर्मी की दोपहर थी। हल्की लू चल रही थी, और शीतल बालकनी में खड़ी होकर चाय की चुस्कियाँ ले रही थी। तभी उसके पड़ोसी, अमित, जो कि हैंडसम और थोड़ा शरारती किस्म का लड़का था, उसकी ओर देखते हुए मुस्कुराया। शीतल भी हल्का-सा मुस्कुरा दी। कुछ दिनों से अमित और शीतल के बीच एक अनकही बातचीत हो रही थी—निगाहों के ज़रिए।


अमित अक्सर अपने घर की छत पर आता, कभी-कभी कोई बहाना बनाकर शीतल से बातें करने लगता। पहले तो शीतल ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन फिर उसे भी अमित का ध्यान उसकी ओर खींचने लगा।

सांसों की नजदीकियाँ


एक दिन दोपहर के वक्त बिजली चली गई, और शीतल पसीने से तर-बतर हो रही थी। उसने सोचा, क्यों न छत पर जाकर थोड़ी ताज़ी हवा ली जाए। जैसे ही वह छत पर पहुंची, अमित पहले से ही वहां मौजूद था। वह उसे देखकर मुस्कुराया, "क्या गर्मी बहुत सताने लगी, भाभी?"


शीतल भी मुस्कुरा दी, "हां, लग रहा है जैसे सूरज आग उगल रहा हो।"

अमित ने शरारती अंदाज में कहा, "तो फिर बारिश का इंतज़ार किया जाए?"

शीतल ने कुछ नहीं कहा, बस हल्की-सी हंसी हंस दी। अमित ने धीरे-धीरे बातों का सिलसिला आगे बढ़ाया। उनकी बातें अब आम बोलचाल से आगे बढ़कर छेड़छाड़ और हंसी-मजाक में बदल चुकी थीं।


एक दिन जब शीतल घर में अकेली थी, तब दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजा खोला तो सामने अमित था। उसके हाथ में एक प्लेट थी, जिसमें कुछ समोसे थे। "भाभी, मां ने भेजे हैं, सोचा आपके साथ चाय पर इंजॉय कर लूं," अमित ने कहा।


शीतल ने उसे अंदर बुला लिया। दोनों ने साथ में समोसे खाए, बातें कीं, और हंसी-मजाक हुआ। अमित की बातें शीतल के दिल में हलचल मचाने लगीं। उसकी हंसी, उसकी शरारती बातें, और वो आंखों में अजीब-सा आकर्षण… सब कुछ उसे अजीब-सी खुशी देने लगा।

बरसात की हलचल

एक शाम अचानक बारिश आ गई। शीतल बालकनी में खड़ी होकर भीग रही थी, तभी अमित भी अपनी छत पर आ गया। उसने शीतल को देखा और हल्के-से मुस्कुराया। शीतल ने भी उसे देखा, लेकिन इस बार उसकी आँखों में कुछ अलग ही चमक थी।


अमित ने इशारे से उसे ऊपर बुलाया। पहले तो शीतल झिझकी, लेकिन फिर न जाने क्यों, उसका दिल जोरों से धड़कने लगा। वह छत पर गई, और अमित ने मज़ाक में कहा, "भाभी, इतनी भीग जाएंगी तो बुखार आ जाएगा।"


शीतल ने जवाब दिया, "तो क्या करूँ, बारिश रोक दूं?"

अमित ने उसकी आँखों में झाँका, "या फिर मैं आपकी ठंड दूर करने का इंतज़ाम कर दूं?"


शीतल के गाल सुर्ख हो गए। अमित धीरे-धीरे उसके करीब आया। बारिश की बूंदें उनके बीच गिर रही थीं, लेकिन उनकी सांसें अब एक-दूसरे की गर्मी को महसूस कर रही थीं।


नजदीकियों की हदें


शीतल को नहीं पता था कि वह क्यों खुद को रोक नहीं पा रही थी। उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, और अमित की गर्म साँसें उसके चेहरे को छू रही थीं। अमित ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया, और उसके गीले बालों से खेलते हुए बोला, "भाभी, कभी-कभी दिल की सुननी चाहिए, दिमाग की नहीं।"


शीतल ने उसकी आँखों में देखा। उसकी नज़रों में एक ऐसा आकर्षण था, जिससे वह खुद को रोक नहीं पाई। अमित ने धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया, और उनकी साँसें एक-दूसरे से टकराने लगीं। बारिश की हल्की-हल्की फुहारों के बीच, उन्होंने अपनी भावनाओं को खुलकर जीने दिया…


अगली सुबह


सुबह जब शीतल की आँख खुली, तो वह खुद से सवाल कर रही थी—क्या यह सही था? लेकिन उसके होंठों पर एक अजीब-सी मुस्कान थी। उसकी ज़िंदगी में एक नया एहसास जाग चुका था, जो उसे फिर से जिंदा महसूस करा रहा था…



देवर-भाभी का अनोखा रिश्ता

 देवर-भाभी का अनोखा रिश्ता



गाँव में बसे छोटे से कस्बे में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था, वहाँ रहने वाले रवि और उसकी भाभी सुमन की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी। रवि का बड़ा भाई अजय सेना में था और महीने-महीने भर घर नहीं आ पाता था। ऐसे में घर की सारी जिम्मेदारी उसकी पत्नी सुमन पर थी।


पहली मुलाकात की शरारत



रवि पढ़ाई के लिए शहर गया हुआ था और अब छुट्टियों में गाँव लौटा था। चार साल बाद उसे देखकर उसकी भाभी बहुत खुश थी। लेकिन रवि को देखकर सुमन को एहसास हुआ कि वह अब पहले जैसा मासूम लड़का नहीं रहा। वह लंबा, गठीला और स्मार्ट हो गया था।


एक दिन जब सुमन आंगन में कपड़े डाल रही थी, तभी तेज हवा चलने लगी और उसकी साड़ी का पल्लू उड़ गया। वह उसे संभाल ही रही थी कि पीछे से रवि की हंसी सुनाई दी।


"भाभी, अब तो आपको साड़ी संभालने की आदत हो जानी चाहिए," रवि ने मजाक किया।



सुमन ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा, "अच्छा, बहुत आए हो शरारती! शहर जाकर बड़े तेज हो गए हो!"


रवि ने हंसते हुए कहा, "अब भाभी से थोड़ा मजाक भी नहीं कर सकते क्या?"


करीबियां बढ़ने लगीं


रवि को सुमन के हाथ का खाना बहुत पसंद था। वह हर दिन किसी न किसी बहाने से किचन में चला आता और सुमन को परेशान करता।



एक दिन जब सुमन रसोई में खीर बना रही थी, रवि चुपके से पीछे आया और धीरे से बोला, "भाभी, खीर बहुत टेस्टी लग रही है, थोड़ा पहले ही चख लूं?"


सुमन चौंक गई और बोली, "पहले बाहर जाओ, फिर मिलेगा।"


रवि ने शरारत से कहा, "पहले मुझे खिलाओ, फिर जाऊंगा।"


सुमन ने मुस्कराते हुए चम्मच रवि के पास बढ़ाया, और जैसे ही उसने खीर खाई, हल्का सा गर्म था। रवि चिल्लाया, "अरे भाभी, जल गया!"



सुमन हंसने लगी, "अरे, धीरे खाओ ना!"

उन दोनों की हंसी पूरे घर में गूंज गई।

मन में उठती भावनाएँ

दिन बीतते गए और दोनों की नोक-झोंक चलती रही। लेकिन अब रवि को अहसास हो रहा था कि वह सुमन की नज़दीकियों में कुछ अलग महसूस करने लगा है। वह बस उसके पास रहने के बहाने ढूंढता। उधर सुमन को भी अहसास होने लगा कि वह रवि के साथ वक्त बिताना पसंद करने लगी है।

एक रात बिजली चली गई और घर में अंधेरा हो गया। सुमन डर से कांप रही थी। रवि ने हंसते हुए कहा, "अरे भाभी, आप तो बहादुर थीं, ये क्या?"

सुमन ने धीरे से कहा, "मुझे अंधेरे से डर लगता है।"

रवि ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, "जब तक मैं हूँ, आपको डरने की जरूरत नहीं।"

उसका स्पर्श पाकर सुमन का दिल तेजी से धड़कने लगा। पहली बार उसने रवि को अलग नजरिए से देखा।

मर्यादा बनाम भावनाएँ

अब दोनों के मन में हलचल थी। वे जानते थे कि जो महसूस कर रहे हैं, वह सही नहीं है। सुमन विवाहित थी, और रवि उसका देवर। लेकिन भावनाओं पर किसी का बस नहीं चलता।

अगली सुबह, रवि ने सुमन से कहा, "भाभी, मैं कल वापस शहर जा रहा हूँ।"

सुमन चौंक गई, "इतनी जल्दी?"

रवि ने उसकी आँखों में देखा और धीरे से कहा, "अगर रुक गया, तो शायद कभी जा नहीं पाऊंगा।"सुमन समझ गई कि वह क्या कहना चाहता है। उसकी आँखें भर आईं, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए कहा, "जाना तो पड़ेगा, लेकिन खुद को संभालकर रखना।"

रवि ने एक आखिरी बार उसकी ओर देखा और घर से निकल गया। सुमन वहीं खड़ी रही, अपने मन को समझाते हुए कि कुछ रिश्ते चाहकर भी मुकम्मल नहीं हो सकते।👄👫👄👄



भाभी का प्यार

 रवि अपने बड़े भाई और भाभी के साथ शहर में रहता था। उसके माता-पिता गाँव में थे, और पढ़ाई के चलते वह यहाँ रह रहा था। उसकी भाभी, सुमन, बेहद खूबसूरत और समझदार थी। रवि की हर ज़रूरत का ख्याल रखती थी। धीरे-धीरे, रवि को अहसास हुआ कि वह अपनी भाभी की ओर आकर्षित हो रहा है।
एक दिन बारिश हो रही थी, और बिजली चली गई। घर में बस मोमबत्ती की हल्की रोशनी थी। सुमन ने रवि से कहा, "रवि, ज़रा पानी लाना, बहुत प्यास लगी है।" रवि पानी लेकर आया, तो देखा कि सुमन भीग चुकी थी और उसकी साड़ी उसके बदन से चिपक रही थी। रवि की नज़रें सुमन पर टिक गईं।
सुमन ने उसे पकड़ा और हँसते हुए कहा, "क्या देख रहे हो? कभी बारिश नहीं देखी क्या?" रवि घबरा गया और बोला, "न...नहीं भाभी, आप बहुत सुंदर लग रही हैं।" यह सुनकर सुमन हल्का सा मुस्कराई और पास आकर बोली, "शरारती लड़के, चलो, अंदर चलो, कहीं ठंड न लग जाए।"
इस रात के बाद दोनों के बीच एक अजीब-सा रिश्ता बनने लगा। वे एक-दूसरे की आँखों में कई बातें पढ़ सकते थे, लेकिन यह जानते थे कि उनके बीच एक मर्यादा थी।

एक दिन बारिश हो रही थी, और बिजली चली गई। घर में बस मोमबत्ती की हल्की रोशनी थी। सुमन ने रवि से कहा, "रवि, ज़रा पानी लाना, बहुत प्यास लगी है।" रवि पानी लेकर आया, तो देखा कि सुमन भीग चुकी थी और उसकी साड़ी उसके बदन से चिपक रही थी। रवि की नज़रें सुमन पर टिक गईं।
सुमन ने उसे पकड़ा और हँसते हुए कहा, "क्या देख रहे हो? कभी बारिश नहीं देखी क्या?" रवि घबरा गया और बोला, "न...नहीं भाभी, आप बहुत सुंदर लग रही हैं।" यह सुनकर सुमन हल्का सा मुस्कराई और पास आकर बोली, "शरारती लड़के, चलो, अंदर चलो, कहीं ठंड न लग जाए।"
इस रात के बाद दोनों के बीच एक अजीब-सा रिश्ता बनने लगा। वे एक-दूसरे की आँखों में कई बातें पढ़ सकते थे, लेकिन यह जानते थे कि उनके बीच एक मर्यादा थी।
अगर आपको इस कहानी में और रोमांस या सस्पेंस चाहिए, तो बताइए, मैं इसे आगे बढ़ा सकता हूँ!


भाभी का प्यार – भाग 2

रवि और सुमन के बीच अब एक अजीब सा आकर्षण था, लेकिन दोनों अपनी भावनाओं को जाहिर नहीं कर रहे थे। सुमन को भी यह अहसास हो रहा था कि रवि की नज़रों में उसके लिए कुछ अलग ही भाव हैं। लेकिन वह एक संस्कारी औरत थी, जो अपनी मर्यादाओं को समझती थी।


बारिश की रात


उस रात के बाद, रवि अक्सर सुमन के पास बैठने के बहाने ढूँढता। कभी चाय पीते हुए, कभी घर के काम में मदद करने के लिए। सुमन भी उसकी इन कोशिशों को महसूस कर रही थी, लेकिन उसने कभी रवि को सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा।


एक दिन फिर से बारिश हो रही थी। घर में भाई नहीं थे, वे अपने काम से दो दिन के लिए बाहर गए थे। सुमन बालकनी में खड़ी थी, जब रवि ने पीछे से आकर कहा,

"भाभी, बारिश में भीगने का मज़ा ही कुछ और होता है, ना?"

सुमन मुस्कुराई और बोली, "हाँ, लेकिन जब कोई तुम्हारी तरह किसी को लगातार देखे, तो बारिश और भी खास लगने लगती है।"


रवि उसकी बात सुनकर थोड़ा झेंप गया। लेकिन सुमन ने पहली बार इतनी खुलकर बात की थी।


करीबियों की हद


सुमन का पल्लू कंधे से सरक गया था, और रवि की नज़रें उस पर टिक गईं। सुमन ने ध्यान दिया और धीरे से कहा,

"रवि, तुम कुछ ज्यादा ही शरारती होते जा रहे हो।"

रवि ने धीरे से कहा, "भाभी, आप सच में बहुत खूबसूरत हैं..."


सुमन ने उसकी आँखों में देखा, जैसे कुछ सोच रही हो। लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाला और बोली,

"रवि, कुछ रिश्तों की एक सीमा होती है, और हमें उसे पार नहीं करना चाहिए।"

रवि को समझ आ गया कि भाभी भी कुछ महसूस करती हैं, लेकिन वह इस रिश्ते को किसी गलत मोड़ पर नहीं जाने देना चाहतीं।


क्या होगा आगे?


क्या रवि और सुमन अपनी भावनाओं को काबू में रख पाएंगे? या फिर उनकी भावनाएँ एक हद पार कर जाएँगी?

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