देवर-भाभी का अनोखा रिश्ता
गाँव में बसे छोटे से कस्बे में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था, वहाँ रहने वाले रवि और उसकी भाभी सुमन की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी। रवि का बड़ा भाई अजय सेना में था और महीने-महीने भर घर नहीं आ पाता था। ऐसे में घर की सारी जिम्मेदारी उसकी पत्नी सुमन पर थी।
पहली मुलाकात की शरारत
रवि पढ़ाई के लिए शहर गया हुआ था और अब छुट्टियों में गाँव लौटा था। चार साल बाद उसे देखकर उसकी भाभी बहुत खुश थी। लेकिन रवि को देखकर सुमन को एहसास हुआ कि वह अब पहले जैसा मासूम लड़का नहीं रहा। वह लंबा, गठीला और स्मार्ट हो गया था।
एक दिन जब सुमन आंगन में कपड़े डाल रही थी, तभी तेज हवा चलने लगी और उसकी साड़ी का पल्लू उड़ गया। वह उसे संभाल ही रही थी कि पीछे से रवि की हंसी सुनाई दी।
"भाभी, अब तो आपको साड़ी संभालने की आदत हो जानी चाहिए," रवि ने मजाक किया।
सुमन ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा, "अच्छा, बहुत आए हो शरारती! शहर जाकर बड़े तेज हो गए हो!"
रवि ने हंसते हुए कहा, "अब भाभी से थोड़ा मजाक भी नहीं कर सकते क्या?"
करीबियां बढ़ने लगीं
रवि को सुमन के हाथ का खाना बहुत पसंद था। वह हर दिन किसी न किसी बहाने से किचन में चला आता और सुमन को परेशान करता।
एक दिन जब सुमन रसोई में खीर बना रही थी, रवि चुपके से पीछे आया और धीरे से बोला, "भाभी, खीर बहुत टेस्टी लग रही है, थोड़ा पहले ही चख लूं?"
सुमन चौंक गई और बोली, "पहले बाहर जाओ, फिर मिलेगा।"
रवि ने शरारत से कहा, "पहले मुझे खिलाओ, फिर जाऊंगा।"
सुमन ने मुस्कराते हुए चम्मच रवि के पास बढ़ाया, और जैसे ही उसने खीर खाई, हल्का सा गर्म था। रवि चिल्लाया, "अरे भाभी, जल गया!"
सुमन हंसने लगी, "अरे, धीरे खाओ ना!"
उन दोनों की हंसी पूरे घर में गूंज गई।
मन में उठती भावनाएँ
दिन बीतते गए और दोनों की नोक-झोंक चलती रही। लेकिन अब रवि को अहसास हो रहा था कि वह सुमन की नज़दीकियों में कुछ अलग महसूस करने लगा है। वह बस उसके पास रहने के बहाने ढूंढता। उधर सुमन को भी अहसास होने लगा कि वह रवि के साथ वक्त बिताना पसंद करने लगी है।
एक रात बिजली चली गई और घर में अंधेरा हो गया। सुमन डर से कांप रही थी। रवि ने हंसते हुए कहा, "अरे भाभी, आप तो बहादुर थीं, ये क्या?"
सुमन ने धीरे से कहा, "मुझे अंधेरे से डर लगता है।"
रवि ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, "जब तक मैं हूँ, आपको डरने की जरूरत नहीं।"
उसका स्पर्श पाकर सुमन का दिल तेजी से धड़कने लगा। पहली बार उसने रवि को अलग नजरिए से देखा।
मर्यादा बनाम भावनाएँ
अब दोनों के मन में हलचल थी। वे जानते थे कि जो महसूस कर रहे हैं, वह सही नहीं है। सुमन विवाहित थी, और रवि उसका देवर। लेकिन भावनाओं पर किसी का बस नहीं चलता।
अगली सुबह, रवि ने सुमन से कहा, "भाभी, मैं कल वापस शहर जा रहा हूँ।"
सुमन चौंक गई, "इतनी जल्दी?"
रवि ने उसकी आँखों में देखा और धीरे से कहा, "अगर रुक गया, तो शायद कभी जा नहीं पाऊंगा।"सुमन समझ गई कि वह क्या कहना चाहता है। उसकी आँखें भर आईं, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए कहा, "जाना तो पड़ेगा, लेकिन खुद को संभालकर रखना।"
रवि ने एक आखिरी बार उसकी ओर देखा और घर से निकल गया। सुमन वहीं खड़ी रही, अपने मन को समझाते हुए कि कुछ रिश्ते चाहकर भी मुकम्मल नहीं हो सकते।👄👫👄👄





Beautiful story
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